भगवान राम के आदर्श आज भी प्रासंगिक क्यों हैं? : श्री श्री रविशंकर जी




भगवान राम के आदर्श आज भी प्रासंगिक क्यों हैं?
गुरुदेव श्री श्री रविशंकर जी


जो कण-कण में व्याप्त है, वही राम है। राम हमारे जीवन का ‘प्रकाश’ हैं। हम अक्सर अपने भीतर के प्रकाश को ‘खोजने’ का प्रयास करते हैं, बस इतना समझ लीजिए कि आप स्वयं ही प्रकाश हैं। जब आपको यह समझ आ जाती है, तो आप अपनी सभी भावनात्मक उथल-पुथल से मुक्त हो जाते हैं और आपके जीवन में शांति आ जाती है।


राम हमें संघर्ष के बीच भी जागरूकता और धैर्य बनाए रखना सिखाते हैं।

जब आप जागरूक होते हैं, तो आप देखते हैं कि जीवन एक संघर्ष है। दुनिया में संघर्ष है, रिश्तों में संघर्ष है, जीवन के लगभग हर कोने में संघर्ष है। लेकिन जब आप और अधिक जागरूक बनते हैं, जब आपकी बुद्धि विकसित होती है, तब आपको समझ आता है कि यह सब एक ‘खेल’ है। राम का जीवन संघर्षों से भरा था, फिर भी उन्होंने जीवन की हर भूमिका को सत्य, जागरूकता, करुणा, ईमानदारी और भक्ति के साथ निभाया।


जब आप जागरूक और वर्तमान में रहते हैं, तब आप किसी को अपना दुश्मन नहीं मान सकते। जब आप किसी को दुश्मन मानते हैं, तो वह धारणा आपके लिए हकीकत बन जाती है और आप उसी पर विश्वास करने लगते हैं। भावनाएँ ऐसी ही होती हैं—वे आती हैं और हमें अपने वश में कर लेती हैं। उस समय हमारी तर्क करने की क्षमता पीछे रह जाती है। लेकिन जैसे ही आप पहचान लेते हैं कि भावनाएँ आपको नियंत्रित कर रही हैं, आप स्वयं ही उससे एक कदम दूर हो जाते हैं, और फिर आप संघर्ष में भी विचलित नहीं होते।


भगवान राम का जीवन हमें अनुशासित रहना सिखाता है।

जीवन में अनुशासन तीन कारणों से आता है—प्रेम, लोभ और भय। सबसे पहले, आप प्रेम से अनुशासित रहते हैं। यद्यपि प्रेम के लिए अनुशासन की आवश्यकता नहीं होती, फिर भी प्रेम स्वयं अनुशासन बनाए रखता है। अनुशासन लोभ और भय से भी आ सकता है। जब कोई कहता है कि यदि आप अनुशासित नहीं रहेंगे तो आपको नुकसान होगा, तो आप लोभ या भय के कारण अनुशासन का पालन करते हैं। जैसे, डॉक्टर कहता है कि यदि आप नियमों का पालन नहीं करेंगे तो आप बीमार पड़ सकते हैं, तो आप बीमारी के डर से अनुशासन में रहते हैं। लेकिन सबसे श्रेष्ठ है—निष्ठा और प्रेम से अनुशासित रहना।


राम का नाम सफलता का पर्याय है।

सफलता हमेशा भगवान राम से जुड़ी रही है। कहा जाता है कि भगवान राम का कोई भी बाण अपने लक्ष्य से नहीं चूकता था। इसलिए आज भी ‘रामबाण’ शब्द का प्रयोग किसी समस्या के अंतिम समाधान के लिए किया जाता है। हर व्यक्ति सफल होना चाहता है, लेकिन हम वास्तव में सफलता का अर्थ नहीं समझते। सच्ची सफलता केवल भौतिक उपलब्धि नहीं है। आपके चेहरे पर ऐसी सशक्त मुस्कान होनी चाहिए जिसे कोई छीन न सके, आपके भीतर ऐसा साहस होना चाहिए जो विपरीत परिस्थितियों में भी कम न हो। यही सच्ची सफलता का प्रतीक है। जीवन के सभी पहलुओं को राग-द्वेष से परे संतुलित रखना ही वास्तविक सफलता है।


इस राम नवमी पर अपने भीतर के ‘प्रकाश’ को प्रज्वलित करें।

हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र नवमी के दिन भगवान राम का जन्म हुआ था, और यह दिन हमें सभी चिंताओं को छोड़कर वर्तमान क्षण में जीने की याद दिलाता है। खुश रहें, संतोष में रहें और इसी क्षण अपनी सभी पुरानी शिकायतों को छोड़ दें। मुस्कान फैलाएं और प्रेम बांटें। भले ही भगवान राम ने कोई उपदेश न दिया हो, फिर भी उनके आदर्श आज भी हमारा मार्गदर्शन करते हैं।


इस राम नवमी, अपने भीतर के राम को जागृत करें और प्रेम, शांति और अनुशासन से अपने जीवन को प्रकाशमय बनाएं।

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