महाविनाश की दहलीज पर खड़ी दुनिया: इजरायल-अमेरिका का ईरान पर भीषण प्रहार और ट्रंप का 'नो डील' वार



महाविनाश की दहलीज पर खड़ी दुनिया: इजरायल-अमेरिका का ईरान पर भीषण प्रहार और ट्रंप का 'नो डील' वार

खास रिपोर्ट: 'टच गुजरात' न्यूज़ डेस्क

14 मार्च 2026 की सुबह जब दुनिया की आँखें खुलीं, तो मंजर बदला हुआ था। मिडिल ईस्ट की जमीन से उठते धुएं और आग की लपटों ने साफ कर दिया है कि अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है। इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान के सीने पर जो घाव दिए हैं, उसने तीसरे विश्व युद्ध की आहट को और तेज कर दिया है। ईरान का 'इस्फहान' शहर, जो कभी अपनी संस्कृति के लिए जाना जाता था, आज मलबे और चीख-पुकार के बीच सिसक रहा है। 'ऑपरेशन रोरिंग लायन' के तहत किए गए इस हमले ने न केवल ईरान की कमर तोड़ दी है, बल्कि पूरी दुनिया की इकोनॉमी और शांति को दांव पर लगा दिया है।

इस्फहान में आधी रात का 'तांडव'

                                            (Image  curtecy : Mathrubhumi English)

बीती रात जब इस्फहान के लोग सो रहे थे, तभी आसमान से इजरायली और अमेरिकी फाइटर जेट्स ने मौत बरसाना शुरू कर दिया। ये कोई मामूली एयरस्ट्राइक नहीं थी, बल्कि एक सोची-समझी रणनीतिक चोट थी। इस हमले में ईरान के सबसे महत्वपूर्ण 'स्पेस रिसर्च सेंटर' को निशाना बनाया गया। रिपोर्ट्स की मानें तो इस सेंटर का इस्तेमाल ईरान अपनी मिसाइल टेक्नोलॉजी को और घातक बनाने के लिए कर रहा था। हमले की तीव्रता इतनी अधिक थी कि आसपास की इमारतों के शीशे टूट गए और कई किलोमीटर दूर तक धमाकों की गूँज सुनाई दी।

इस हमले में अब तक 15 लोगों के मारे जाने की आधिकारिक पुष्टि हुई है, लेकिन मलबे के नीचे दबे लोगों की संख्या देखते हुए ये आंकड़ा और बढ़ सकता है। ईरान ने दावा किया है कि मारे गए लोग मासूम नागरिक थे, जबकि इजरायल का कहना है कि उन्होंने सिर्फ सैन्य ठिकानों और मिसाइल डिपो को निशाना बनाया है। इस हमले के तुरंत बाद ईरान की 'रिवोल्यूशनरी गार्ड्स' (IRGC) ने भी जवाबी कार्रवाई की और इजरायल के रिहायशी इलाकों की तरफ मिसाइलें दाग दीं। आज सुबह इजरायल के तेल अवीव और हाइफा जैसे शहरों में सायरन की आवाजें लोगों को बंकरों में जाने की चेतावनी दे रही थीं।

ट्रंप का 'नो डील' स्टैंड और ईरान को खुली चुनौती

इस पूरी आग में घी डालने का काम किया है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों ने। व्हाइट हाउस से जारी अपने कड़क संदेश में ट्रंप ने साफ कर दिया है कि वे ईरान के साथ किसी भी तरह की बातचीत या समझौते (Deal) के मूड में नहीं हैं। ट्रंप का ये 'नो डील' स्टैंड पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन गया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसकी धमकियों का अंत अब समझौते से नहीं, बल्कि ताकत से होगा।

ट्रंप यहीं नहीं रुके; उन्होंने ईरान के सबसे संवेदनशील आर्थिक केंद्र 'खार्ग आइलैंड' (Kharg Island) पर दोबारा हमला करने की खुली धमकी दी है। खार्ग आइलैंड ईरान के तेल निर्यात का दिल माना जाता है, जहाँ से उसका 90% से ज्यादा कच्चा तेल दुनिया भर में जाता है। ट्रंप ने बड़े ही बेबाक और थोड़े डरावने अंदाज में कहा कि वे इस आइलैंड को निशाना बना सकते हैं और उनके लिए ये एक खेल जैसा होगा। ट्रंप का यह रवैया दिखाता है कि अमेरिका अब 'सॉफ्ट पावर' नहीं, बल्कि 'हार्ड पावर' के मोड में है। उन्होंने मिडिल ईस्ट में अपनी नौसेना और मरीन्स की संख्या बढ़ाने के आदेश दे दिए हैं, जिसका मतलब है कि आने वाले दिनों में घेराबंदी और भी सख्त होने वाली है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य: दुनिया की दुखती रग

इस जंग का सबसे खतरनाक पहलू है 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' (Strait of Hormuz)। आप जानते ही है कि दुनिया के कुल तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ईरान ने अपनी पुरानी चाल चलते हुए फिर से धमकी दी है कि अगर अमेरिका और इजरायल नहीं रुके, तो वो इस रास्ते को पूरी तरह बंद कर देगा। अगर ऐसा हुआ, तो पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी और वैश्विक सप्लाई चेन पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी।

दूसरी तरफ, ट्रंप ने अपने मित्र देशों को संदेश भेज दिया है कि वे अपनी नौसेना तैयार रखें। अमेरिका किसी भी कीमत पर इस रास्ते को खुला रखना चाहता है, चाहे इसके लिए उसे सीधे तौर पर ईरान की नेवी से भिड़ना क्यों न पड़े। समुद्र के इस संकरे रास्ते पर आज बारूद की गंध छाई हुई है और किसी भी वक्त एक छोटी सी चिंगारी बड़ी आग लगा सकती है।

सुप्रीम लीडर पर सस्पेंस और प्रोपेगेंडा का खेल

ईरान के अंदरूनी हालात भी कुछ ठीक नहीं लग रहे हैं। वहां के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई पिछले कई दिनों से सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए हैं। ट्रंप ने दावा किया है कि मुजतबा हमलों में घायल हुए हैं या शायद अब इस दुनिया में नहीं हैं। हालांकि, ईरान ने इन दावों को सिरे से खारिज किया है, लेकिन मुजतबा की गैर-मौजूदगी ने ईरान की जनता और सेना के बीच एक डर पैदा कर दिया है।

उधर इजरायल में भी अफवाहों का बाजार गर्म था। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मौत की खबर सोशल मीडिया पर आग की तरह फैली, जिसे बाद में इजरायली सरकार ने 'फेक न्यूज' करार दिया। ये साफ है कि इस जंग में सिर्फ मिसाइलों का इस्तेमाल नहीं हो रहा, बल्कि 'इंफॉर्मेशन वॉर' भी अपने चरम पर है। दोनों तरफ से प्रोपेगेंडा का इस्तेमाल जनता का मनोबल तोड़ने के लिए किया जा रहा है।

निष्कर्ष: क्या हम विश्व युद्ध की ओर बढ़ रहे हैं?

आज की स्थिति को देखकर ये कहना गलत नहीं होगा कि दुनिया एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ से वापसी का रास्ता बहुत मुश्किल है। एक तरफ इजरायल और अमेरिका की बेखौफ ताकत है, तो दूसरी तरफ ईरान का 'करो या मरो' वाला रवैया। ट्रंप की 'नो डील' पॉलिसी ने कूटनीति के सारे दरवाजे बंद कर दिए हैं। रूस और चीन भी इस पूरी स्थिति पर पैनी नजर गड़ाए हुए हैं और अगर उन्होंने सीधे तौर पर ईरान का साथ दिया, तो ये जंग सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगी।

भारत के लिए भी ये स्थिति बहुत चुनौतीपूर्ण है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और हमारे लाखों भारतीयों की सुरक्षा, जो खाड़ी देशों में रहते हैं, सरकार के लिए बड़ी चिंता का सबब है। 'टच गुजरात' के माध्यम से हम अपने पाठकों को यही कहेंगे कि आने वाले कुछ दिन वैश्विक राजनीति के लिए निर्णायक होने वाले हैं। शांति की उम्मीदें धुंधली पड़ रही हैं और बारूद की गर्जना तेज होती जा रही है।

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