कहीं आप अनजाने में तो नहीं कर रहे देश के गौरव का अपमान? पढ़िए 'फ्लैग कोड' की अनसुनी बातें
कहीं आप अनजाने में तो नहीं कर रहे देश के गौरव का अपमान?
तिरंगा हमारी आन, बान और शान का प्रतीक है। हर राष्ट्रीय त्यौहार पर हम गर्व से झंडा फहराते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि तिरंगे को फहराने, उसे रखने और यहाँ तक कि उसे उतारने के भी कड़े कानून हैं? भारत सरकार ने 'भारतीय ध्वज संहिता 2002' (Flag Code of India) के तहत कुछ ऐसे नियम बनाए हैं, जिनका पालन करना हर नागरिक का संवैधानिक कर्तव्य है। एक छोटी सी लापरवाही आपको कानूनी मुश्किल में डाल सकती है। आइए जानते हैं वो बातें, जो शायद एक आम आदमी को नहीं पता होंगी।
तिरंगा हमारी आन, बान और शान का प्रतीक है। हर राष्ट्रीय त्यौहार पर हम गर्व से झंडा फहराते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि तिरंगे को फहराने, उसे रखने और यहाँ तक कि उसे उतारने के भी कड़े कानून हैं? भारत सरकार ने 'भारतीय ध्वज संहिता 2002' (Flag Code of India) के तहत कुछ ऐसे नियम बनाए हैं, जिनका पालन करना हर नागरिक का संवैधानिक कर्तव्य है। एक छोटी सी लापरवाही आपको कानूनी मुश्किल में डाल सकती है। आइए जानते हैं वो बातें, जो शायद एक आम आदमी को नहीं पता होंगी।
1. आकार और अनुपात का 'गोल्डन रूल'
झंडे का आकार आयताकार (Rectangular) होना चाहिए। इसकी लंबाई और ऊंचाई का अनुपात हमेशा 3:2 होना चाहिए। यानी अगर लंबाई 3 फीट है, तो चौड़ाई 2 फीट ही होनी चाहिए।
झंडे का आकार आयताकार (Rectangular) होना चाहिए। इसकी लंबाई और ऊंचाई का अनुपात हमेशा 3:2 होना चाहिए। यानी अगर लंबाई 3 फीट है, तो चौड़ाई 2 फीट ही होनी चाहिए।
2. अब 24 घंटे फहरा सकते हैं तिरंगा (नया बदलाव)
पहले नियम था कि तिरंगा सिर्फ सूर्योदय से सूर्यास्त तक ही फहराया जा सकता है। लेकिन 20 जुलाई 2022 को हुए संशोधन के बाद, अब कोई भी नागरिक अपने घर पर दिन और रात (24 घंटे) तिरंगा फहरा सकता है, बशर्ते वह खुले स्थान पर हो और गरिमा के साथ फहराया जाए।
पहले नियम था कि तिरंगा सिर्फ सूर्योदय से सूर्यास्त तक ही फहराया जा सकता है। लेकिन 20 जुलाई 2022 को हुए संशोधन के बाद, अब कोई भी नागरिक अपने घर पर दिन और रात (24 घंटे) तिरंगा फहरा सकता है, बशर्ते वह खुले स्थान पर हो और गरिमा के साथ फहराया जाए।
3. कपड़े का चुनाव: सिर्फ़ खादी नहीं
पुराने नियमों के मुताबिक तिरंगा सिर्फ़ हाथ से काते हुए सूती या खादी के कपड़े का होना चाहिए था। लेकिन अब मशीन से बने हुए पॉलिएस्टर, कपास, ऊन या रेशमी कपड़े के झंडे का उपयोग भी कानूनी रूप से मान्य है।
पुराने नियमों के मुताबिक तिरंगा सिर्फ़ हाथ से काते हुए सूती या खादी के कपड़े का होना चाहिए था। लेकिन अब मशीन से बने हुए पॉलिएस्टर, कपास, ऊन या रेशमी कपड़े के झंडे का उपयोग भी कानूनी रूप से मान्य है।
4. झंडे की स्थिति और स्थान (सबसे ज़रूरी नियम)
तिरंगे को हमेशा सम्मानजनक स्थान पर फहराना चाहिए। यहाँ अक्सर लोग गलती करते हैं:
केसरिया पट्टी हमेशा ऊपर: झंडा फहराते समय केसरिया रंग की पट्टी सबसे ऊपर होनी चाहिए। उसे कभी भी उल्टा (हरा रंग ऊपर) नहीं फहराना चाहिए।
क्षतिग्रस्त झंडा: कभी भी फटा हुआ या मैला-कुचैला तिरंगा नहीं फहराना चाहिए।
ऊंचाई का नियम: तिरंगे को कभी भी किसी दूसरे झंडे के साथ एक ही डंडे पर नहीं फहराना चाहिए। साथ ही, तिरंगा अन्य सभी झंडों से ऊँचा होना चाहिए।
तिरंगे को हमेशा सम्मानजनक स्थान पर फहराना चाहिए। यहाँ अक्सर लोग गलती करते हैं:
केसरिया पट्टी हमेशा ऊपर: झंडा फहराते समय केसरिया रंग की पट्टी सबसे ऊपर होनी चाहिए। उसे कभी भी उल्टा (हरा रंग ऊपर) नहीं फहराना चाहिए।
क्षतिग्रस्त झंडा: कभी भी फटा हुआ या मैला-कुचैला तिरंगा नहीं फहराना चाहिए।
ऊंचाई का नियम: तिरंगे को कभी भी किसी दूसरे झंडे के साथ एक ही डंडे पर नहीं फहराना चाहिए। साथ ही, तिरंगा अन्य सभी झंडों से ऊँचा होना चाहिए।
5. तिरंगे का 'गलत इस्तेमाल' जो अपराध है
अक्सर लोग जोश में आकर तिरंगे का इस्तेमाल ऐसी जगह करते हैं जो 'फ्लैग कोड' के खिलाफ है:
तिरंगे का उपयोग किसी भी प्रकार के वस्त्र (Uniform), तकिया, रुमाल या ड्रेस के रूप में नहीं किया जा सकता।
इसे किसी वाहन (कार, रेल, नाव) के हुड, ऊपर या किनारों पर लपेटने की अनुमति सिर्फ़ विशेष संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों को ही है।
तिरंगे पर कुछ भी लिखना या छापना सख्त मना है।
अक्सर लोग जोश में आकर तिरंगे का इस्तेमाल ऐसी जगह करते हैं जो 'फ्लैग कोड' के खिलाफ है:
तिरंगे का उपयोग किसी भी प्रकार के वस्त्र (Uniform), तकिया, रुमाल या ड्रेस के रूप में नहीं किया जा सकता।
इसे किसी वाहन (कार, रेल, नाव) के हुड, ऊपर या किनारों पर लपेटने की अनुमति सिर्फ़ विशेष संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों को ही है।
तिरंगे पर कुछ भी लिखना या छापना सख्त मना है।
6. जब झंडा पुराना हो जाए तो क्या करें?
राष्ट्रीय पर्व खत्म होने के बाद अक्सर तिरंगे इधर-उधर पड़े मिलते हैं, जो दिल दुखाने वाला दृश्य होता है। कानूनन, अगर तिरंगा खराब हो जाए या फट जाए, तो उसे सड़कों पर या कचरे में नहीं फेंकना चाहिए।
निपटान का तरीका: ध्वज संहिता के अनुसार, खराब हुए झंडे को पूरी गोपनीयता के साथ मर्यादापूर्वक जलाकर या ज़मीन में गाड़कर नष्ट करना चाहिए। इसे सार्वजनिक रूप से या अपमानजनक तरीके से नहीं फेंकना चाहिए।
राष्ट्रीय पर्व खत्म होने के बाद अक्सर तिरंगे इधर-उधर पड़े मिलते हैं, जो दिल दुखाने वाला दृश्य होता है। कानूनन, अगर तिरंगा खराब हो जाए या फट जाए, तो उसे सड़कों पर या कचरे में नहीं फेंकना चाहिए।
निपटान का तरीका: ध्वज संहिता के अनुसार, खराब हुए झंडे को पूरी गोपनीयता के साथ मर्यादापूर्वक जलाकर या ज़मीन में गाड़कर नष्ट करना चाहिए। इसे सार्वजनिक रूप से या अपमानजनक तरीके से नहीं फेंकना चाहिए।

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