जाग हिन्दू जाग एक आग है तू

जाग हिंदू जाग, एक मशाल है तू,काल भी कांपे जिससे, वो फौलाद है तू।
याद कर वो वैभव, वो सनातन का शिखर,
जिसकी गूँज से थर्राता था, ये नभ और ये थल।
फिर क्यों मौन है तू? क्यों अपनी ही साख पर उपहास है?
शस्त्र उठा, शास्त्र पढ़, तू तो ज्ञान का ही आकाश है।
जाग हिंदू जाग, एक मशाल है तू...
सभ्यता का सूरज था तू, फिर क्यों ये अंधियारा है?
'कुटुंब' कहने वाला तू, क्यों अपनों से ही हारा है?
एक ही ईश्वर की संतान, फिर ये ऊँच-नीच का शोर क्यों?
जो भाई था कल तक तेरा, आज उससे ये मुँह-मोड़ क्यों?
जाति के इन कोठरों में, क्यों अपनी ही शक्ति को काट रहा?
अखंड होने की सामर्थ्य लेकर, तू खुद को टुकड़ों में बाँट रहा?
जाग हिंदू जाग, एक मशाल है तू...
तू तो अर्धनारीश्वर का पूजक, फिर क्यों स्त्री का अपमान है?
जिस बेटी से वंश है तेरा, क्यों उसे देना पड़ता बलिदान है?
माँ को ममता कहने वाले, क्यों कोख में ही खंजर चलता है?
मर्यादा पुरुषोत्तम का वंशज, क्यों मर्यादा से ही छलता है?
धर्म वही जो नारी की रक्षा में, शीश का दान माँगता हो,
धिक्कार है उस पौरुष पर, जो जननी को पैरों की धूल मानता हो।
जाग हिंदू जाग, एक मशाल है तू,काल भी कांपे जिससे, वो फौलाद है तू।
— प्रतीक काशीकर

is pe music ban sakta hai kya? joshila music only with nagada and shankh

No comments

Powered by Blogger.